बुनकारी इंडिया साड़ी
विद्या बालन , किरण खेर , कंगना रनोट , शर्मीला टैगोर , सोनम कपूर , पुत्र , तबू जैसे बॉलीवुड शक्शियत उनकी बुनकरी को पसंद करती है... गौरांग की ऐसे परिवार से है , ... जहा निजामों के शहर पिता एक सफल है...
गौरांग शाह की इस शेल्ली को अपनया है... गौरांग देश के अलग अलग राज्यों , में आंध्र प्रदेश , महाराष्ट्र , गुजरात , तमिलनाडु , उतार प्रदेश , राजस्थान , पश्चिम बंगाल कके अलावा बांग्लादेश के लगभग 700 बुनकरों को सहयोग करते है ,
और फूलो और ज्यॉमेट्रिक के प्रति उनका यह प्यार है की उन्होंने बेझिझक यह शपत ली की वह साड़ी को उसके मूल रूप से ही रखेंगे...
ज़्यादातर धागे खादी , कांजीवरम , पठानी , बनारसी , पाटन , पटोला , कोटा , अप्पादा , ढकई में हमने डिजाइनिंग को सिर्फ बुनकरी से जोड़ा है... यहाँ वह बुनकरों के कला कौशल और में बता रहे है....
.पाटन , गुजरात :-
पाटन पटोला सबसे मुश्किल वस्त्र निर्माण की कला मन जाता है... पाटन दुनिया के सिर्फ उन तीन केन्द्रो है... जो डबल इकट करते है...
इसे बहुत कठिन सटीक बुनाई कौशल आवश्यकता होती है..,
एक छोटी सी गलती पूरी ख़राब कर सकती है , पहले डिज़ाइन को कागज पर ,उकेरा जाता है। .,उसके बाद साड़ी पर करते है इसे बुनने और रंगाई में 7 - 8 महीने तक का समय लगता है...,
लगभग मूर्त हो चुकी बुनाई की इस कला को पुनजीवित करने के लिए पाटन के 70 - 80 युवाओं को डबल इकट का प्रशिक्षण दिया.. इसे लक्मे फैशन वीक में भी पेश किया जा चूका है...
.बनारस , उतार प्रदेश :-
बनारस शहर की परम्परागत बनारस सरीयो को भी नयी ताज़गी दी जा चुकी है.. उन्हने क्रॉस , बॉर्डर पर ऑर्गेंजा , सिल्क , कॉटन , तसर और मूंगा सिल्क से साड़ी बनाई है...
परम्परागत पैठनी डिज़ाइन और कांजीवरम मोटिफ को ओरंगजा पर बना जाता है...
.कांचीपुरम , तमिलनाडु :-
कारवाई पारम्परिक बुनाई पद्धति जो 15 वी और 16 वी सदी से की जा रही है... गौरांग ने इसमें नए प्रयोग किये है..
वह बड़े से बड़ा बॉर्डर सदी में 20 इंच तक का ले रहे है.... कांजीवरम में इकट का नया प्रयोग किया है...
.पैठण , महाराष्ट्र :-
मोर और तोते के छोटे डिज़ाइन के बॉर्डर को पुरे में जाल डिज़ाइन और 28 इंच की बॉर्डर बना दी है...
गौरांग के इस प्रयोग ने १६वी सदी की परम्परागत कला को नयी ताज़गी के साथ प्रस्तुत किया है...
खादी , मूंगा और तसर सिल्क का प्रयोग किया है...
.उपड्डा , आँध्रप्रदेश :-
आँध्रप्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में उपड्डा गांव स्तिथ है....
यहाँ के खादी को ट्विस्ट किया गया है... इसे सिर्फ नरम या कोमल नहीं बनाया है , बल्कि इसे तसर , मूंगा , लिनन , के साथ बनाकर इस पर कठिन प्रिंट भी उकेरे है... जामदानी बुनकरी और क्रॉस बॉर्डर बनाये गए है...
.कोटा , राजस्थान :-
कोटा डोरिया अपने चेक बुनाई के वस्त्रो के लिए जाना जाता है... बुनकर अब तक शरीफ धागे और सादिया ही बना रही है...
इस कपडे को और उचाई देने के लिए गौरांग ने बुनकरों को जामदानी का प्रशिक्षण दिया और सिंपल बूटी डिज़ाइन त्यार किये..
जब बुनकर कौशल में दक्ष हो गौरांग , बड़ी बॉर्डर जामदानी तकनीक से बनवाये....
विद्या बालन , किरण खेर , कंगना रनोट , शर्मीला टैगोर , सोनम कपूर , पुत्र , तबू जैसे बॉलीवुड शक्शियत उनकी बुनकरी को पसंद करती है... गौरांग की ऐसे परिवार से है , ... जहा निजामों के शहर पिता एक सफल है...
गौरांग शाह की इस शेल्ली को अपनया है... गौरांग देश के अलग अलग राज्यों , में आंध्र प्रदेश , महाराष्ट्र , गुजरात , तमिलनाडु , उतार प्रदेश , राजस्थान , पश्चिम बंगाल कके अलावा बांग्लादेश के लगभग 700 बुनकरों को सहयोग करते है ,
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| missaaharshi.com |
ज़्यादातर धागे खादी , कांजीवरम , पठानी , बनारसी , पाटन , पटोला , कोटा , अप्पादा , ढकई में हमने डिजाइनिंग को सिर्फ बुनकरी से जोड़ा है... यहाँ वह बुनकरों के कला कौशल और में बता रहे है....
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पाटन पटोला सबसे मुश्किल वस्त्र निर्माण की कला मन जाता है... पाटन दुनिया के सिर्फ उन तीन केन्द्रो है... जो डबल इकट करते है...
इसे बहुत कठिन सटीक बुनाई कौशल आवश्यकता होती है..,
एक छोटी सी गलती पूरी ख़राब कर सकती है , पहले डिज़ाइन को कागज पर ,उकेरा जाता है। .,उसके बाद साड़ी पर करते है इसे बुनने और रंगाई में 7 - 8 महीने तक का समय लगता है...,
लगभग मूर्त हो चुकी बुनाई की इस कला को पुनजीवित करने के लिए पाटन के 70 - 80 युवाओं को डबल इकट का प्रशिक्षण दिया.. इसे लक्मे फैशन वीक में भी पेश किया जा चूका है...
.बनारस , उतार प्रदेश :-
बनारस शहर की परम्परागत बनारस सरीयो को भी नयी ताज़गी दी जा चुकी है.. उन्हने क्रॉस , बॉर्डर पर ऑर्गेंजा , सिल्क , कॉटन , तसर और मूंगा सिल्क से साड़ी बनाई है...
परम्परागत पैठनी डिज़ाइन और कांजीवरम मोटिफ को ओरंगजा पर बना जाता है...
.कांचीपुरम , तमिलनाडु :-
कारवाई पारम्परिक बुनाई पद्धति जो 15 वी और 16 वी सदी से की जा रही है... गौरांग ने इसमें नए प्रयोग किये है..
वह बड़े से बड़ा बॉर्डर सदी में 20 इंच तक का ले रहे है.... कांजीवरम में इकट का नया प्रयोग किया है...
.पैठण , महाराष्ट्र :-
मोर और तोते के छोटे डिज़ाइन के बॉर्डर को पुरे में जाल डिज़ाइन और 28 इंच की बॉर्डर बना दी है...
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खादी , मूंगा और तसर सिल्क का प्रयोग किया है...
.उपड्डा , आँध्रप्रदेश :-
आँध्रप्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में उपड्डा गांव स्तिथ है....
यहाँ के खादी को ट्विस्ट किया गया है... इसे सिर्फ नरम या कोमल नहीं बनाया है , बल्कि इसे तसर , मूंगा , लिनन , के साथ बनाकर इस पर कठिन प्रिंट भी उकेरे है... जामदानी बुनकरी और क्रॉस बॉर्डर बनाये गए है...
.कोटा , राजस्थान :-
कोटा डोरिया अपने चेक बुनाई के वस्त्रो के लिए जाना जाता है... बुनकर अब तक शरीफ धागे और सादिया ही बना रही है...
इस कपडे को और उचाई देने के लिए गौरांग ने बुनकरों को जामदानी का प्रशिक्षण दिया और सिंपल बूटी डिज़ाइन त्यार किये..
जब बुनकर कौशल में दक्ष हो गौरांग , बड़ी बॉर्डर जामदानी तकनीक से बनवाये....
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